शारदीय नवरात्रि का स्वागत ….
गीत !
कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना ।
गूँज रही अमराई फिर भी, “प्रेम बिना सब सूना”
अनजानी राहों पर चलते,
मिलते मीत पुराने !
खोल हृदय ने दिया निमंत्रण,
खुशियों – भरे तराने !
अधरों ने रसपान किया फिर, लगा न ‘कत्थाचूना’
कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना ।
पीर हृदय की बाँट निभाए,
कहते पीर पराई।
शुष्क धरा का आँचल जिसमें,
अपनापन गहराई।
उड़ी तितलिका रंग बिरंगी,अंतस को यह छूना।
कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना ।
“प्रेम बिना सब सूना” कैसे,
संस्कृति का हर कोना।
झूम उठी लेकर हरियाली,
लिए शारदी दोना।
‘लता’प्रेम की पुण्य पुष्प ले, धूनि रमाए धूना।
कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी


