• सजल

    बरसे घन उद्दाम आज भी।।

    सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.अनिल गहलौत मथुरा निवासी ने मेरा साहित्यिक उपनामकरण ‘लता’ @(१९/७/२०२६ से) किया है। सधन्यवाद आदरणीय को! #सजल समांत–आम/पदांत–आज भी मात्रा भार -१६ ********* लगे विधाता वाम आज भी। छिड़ा हुआ संग्राम आज भी।। रोया मानस पीर जगाकर। प्रेम-प्रकृति अभिराम आज भी।। लिए मनुज-तन जग में आए। जीते हम निष्काम आज भी।। भोग रही काया माया में। कर्म लिखे परिणाम आज भी।। अंग-अंग में प्रीति जगातीं। राधे तुम सुखधाम आज भी।। चले राम जी त्याग अवध को। जग गाता है नाम आज भी।। ‘लता’ प्रेम की कहे कहानी। बरसे घन उद्दाम आज भी।।- *डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी ‘लता’* ————– १९/७/२०२६ समांत-वाम,संग्राम,अभिराम,परिणाम,धाम, नाम, उद्दाम।

  • गीतिका

    “मेघ मल्हार की सरगम पर”

    गीतिका गूंँज उठी अमराई जैसे, कोकिल रव ने गीत लिखा । अनजानी राहों पर चलते, मिलते ज्यों मन मीत लिखा । उड़ी तितलिका रंग बिरंगी, झूम उठी क्यारी-क्यारी, देख निराली सुन्दरता को,मन हो आशातीत लिखा । रस के लोलुप भ्रमर वृंद भी, बड़े सयाने लगते हैं, क्रीड़ा करते मनुहारी पर, कलियों का मन भीत लिखा। मेघ मल्हार की सरगम पर,दिया निमंत्रण बरखा को, शुष्क धरा का फैला आँचल, खुशियों ने संगीत लिखा! लता नहाई रिमझिम बूंदन,गागर से सागर सरसे, बही प्रेम की धारा निर्मल, किंचित हार न जीत लिखा! पार लगाओ भव बंधन से, मुक्त करो मिथ्या जग से, कुछ अनहोनी हो न सके, संशय ने विपरीत लिखा। ‘लता’प्रेम की…

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