• #गीत

    शारदीय नवरात्रि का स्वागत ….

    गीत ! कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना । गूँज रही अमराई फिर भी, “प्रेम बिना सब सूना” अनजानी राहों पर चलते, मिलते मीत पुराने ! खोल हृदय ने दिया निमंत्रण, खुशियों – भरे तराने ! अधरों ने रसपान किया फिर, लगा न ‘कत्थाचूना’ कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना । पीर हृदय की बाँट निभाए, कहते पीर पराई। शुष्क धरा का आँचल जिसमें, अपनापन गहराई। उड़ी तितलिका रंग बिरंगी,अंतस को यह छूना। कोकिल रव ने गीत सुनाए, प्रीति जगाए दूना । “प्रेम बिना सब सूना” कैसे, संस्कृति का हर कोना। झूम उठी लेकर हरियाली, लिए शारदी दोना। ‘लता’प्रेम की पुण्य पुष्प ले, धूनि रमाए धूना।…

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