• गीतिका

    “प्रश्न अनोखे अभी शेष हैं”

    प्रश्न अनोखे अभी शेष हैं #गीत टूट न जाना संघर्षों में,समय सही का साथ निभाना । शर्त यही कर्त्तव्य नेक हों,अनहोनी पर क्या पछताना । आशा पग-पग राह दिखाती । नींव-इमारत को बनवाती । एक एक कर सजें कँगूरे, मन ही मन निश्चित मुस्काती । सुख-दुख में दर्पण सम होना ,मुखर आइने से बतियाना । अनहोनी पर क्या पछताना ———–! भूली बिसरी गति श्वाँसों में । छिपी कामना अहसासों में । “प्रश्न अनोखे अभी शेष हैं” व्यर्थ न करना उपहासों में कोमल सपने उर में जागें,बस मूल मंत्र सा हो जाना अनहोनी पर क्या पछताना ———–! पूर्ण करें हम कर्ज समय का। दृढ़ निश्चय हो मान अभय का । यहीं…

  • गीतिका

    “तुमुल युद्ध की परिणति”

    सजल बंजर होती धरती देखें, हुई प्रकृति भी बाम । तुमुल युद्ध की परिणति देखें, कैसा यह संग्राम।। हिला विश्व का कोना-कोना, छिड़ी हुई मुठभेड़। कुटिल नीतियांँ बाज न आएं,नहीं साम औ दाम।। वैमनस्य आपद कारी यह, द्वैष बढ़ा मतभेद। देव-धरा का साथ निभाना, छोड़ो सारे काम।। शांति-दूत हम सत्य-सनातन, देख सके न जंग। मिलकर हम संकल्प उठाएं, जगती पर हो नाम।। मिट न सके चंदन की गरिमा, विषधर लिपटे अंग। बारूदी संघर्ष कटे अब , मिट जाए ये झाम ।। वैर-भाव की बातें ओछी, नेक हृदय निष्कर्ष । ईश प्रार्थना संकट काटें, मनके-मन के राम।। स्वप्न ‘लता’ के होंगे पूरे, घूमें देश विदेश । चढ़ा सकूँ पुष्पों की माला,…

  • #गीत

    “स्वागत में सतरंगी आभा”

    #होलीकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं! #गीत हाट-बाट सब रंग-बिरंगे,हरित-पीत नभतल अरुणाई। स्वागत में सतरंगी आभा,धूम-धाम से होली आई। छटा बिखेरे रंगों वाली, बालवृंद की अनुपम टोली। तन को-मन को चले भिगोने, भरकर वे खुशियों से झोली। मस्ती करते सखा सँगाती, पीकर नाचे ज्यों ठण्डाई। स्वागत में सतरंगी आभा, धूम-धाम से होली आई। धूप सलोनी आँगन परसे, प्रीति लगाए मन को भाए। खुले केश सजनी के लहरे, पवन निगोड़े रास रचाए। शीत चली मदमाती पीहर,गुनगुन गाती ज्यों फगुआई। स्वागत में सतरंगी आभा, धूम-धाम से होली आई। ढोल-थाप पर नाचे गाएं भंग घोलते जन हुरियारे। मुखर हुए ठण्डाई पीकर, झूम उठीं गलियांँ चौबारे। चंचरीक कलियों में अनबन,रंग देख दोड़ें भरमाई। स्वागत में सतरंगी…

Powered By Indic IME