-
जन्माष्टमी 2026
योगिराज श्रीकृष्ण के विराट रूप को नमन ! #गीत अधर बाँसुरी निर्विकार मन, सरल गांभीर्य अपार। शांत चित्त,वे स्थिर प्रज्ञ का, दिव्य दिखा अवतार। पार्थ मोह के घन कानन में, उदेति गीता सूर्य । अस्त्र,-शस्त्र के बिना समर में, चमके बन वैदूर्य। युद्धभूमि के सिद्ध सारथी , महायोग के द्वार। राधा-प्रेमी, मीरा-दर्पण, सखा-सुदामा सेतु। काल कंस का धर्म रक्षक, फहराया था केतु। योगीश्वर लीलाधर करते, संकट का संंहार । वन-वन डोले वैरागी तन, भव बंधन से दूर। वश में करते नयन भृकुटि से, मंत्र सिद्ध कर्पूर। माखनचोर कहें गोकुल के, श्यामल नंद कुमार। “योगिराज” तुम वही कृष्ण हो,घट-घट पाया दीप्य। हर लीला में रहकर जिससे, अर्थ सहित सामीप्य। समदर्शी प्रभु…


