आँधी/तूफान
+++++ ‘सजल’
लहरों से लड़ता जाता है, माँझी ले पतवार।
बिना थके जो बढ़े निरंतर, कर जाता वह पार॥
उफन रहा है रत्नाकर भी,गरजे-बरसे मेघ।
जीती बाजी तूफानों से, जोश हर-एक बार॥
गहरे जल में राह बनाता, हिम्मत रखें बुलंद।
धीर-वीर हो सच्चा माँझी,अनुपम खेवनहार॥
गहरे मुक्ता-माणिक जिसमें,गहरी नियमित खोज।
थाम लिया जीवट परिपाटी, मेटे जग अँधियार॥
‘लता’विकल है चिंतन भारी,बढ़े हृदय को चीर।
मुस्काए जो संकट में भी, साधे अपनी धार॥
——————–डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी


