#गीत
जीवन के हर पथ पर हम को,मिला सभी का प्यार ।
मैं नइया हूँ इस नइया के, प्रभु ही खेवन हार ।
चाहे सुख के दिन हो चाहे,
हो अँधियारी रात ।
पीड़ा की सौगात कभी थी,
खुशियों की बारात ।
इसी तरह मिलजुल कर हमने,स्वप्न किया साकार ।
मैं नइया हूँ इस नइया के, प्रभु ही खेवन हार ।
पग-पग आती बाधाओं में,
साथ चले निर्बाध ।
थे अनजाने पथिक जहाँ हम,
फिर भी स्नेह अगाध ।
निराकार साकार रूप में, मिला मुझे आधार ।
मैं नइया हूँ इस नइया के, प्रभु ही खेवन हार ।
विनती है मेरी बस इतनी,
साथ न छूटे कंत ।
इस अटूट बंधन में जीवन,
रहे अशेष अनंत ।
कदम-कदम पर “लता” करेगी, तुम से ही शृंगार।
मैं नइया हूँ इस नइया के, प्रभु ही खेवन हार।
डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी
—————


