“आशा की अभिलाषा पूरी”
*स्वर की देवी आशा भोंसले*
#श्रद्धांजलि: स्वर-अमरता को समर्पित
#गीत
छोड़ जगत को जाने वाली, गुंजित स्वर संगीत।
आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत।
प्यार भरे वे सुर अब गूँजे,
अधर-अधर मुस्कान।
श्वासों ने बन्धन तोड़े सब,
स्मृतियांँ हुई महान।
राग-रागिनी रजनीगंधा, अलख जगाती प्रीत।
आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत।
अगन लगाती शरद कौमुदी,
विरहन के हिय द्वंद।
अश्रु थिरे कोरों से टप-टप,
लिखते अन्तिम छंद।
बहे सुनामी उर-थल कंपित, मौन हुआ संगीत।
आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत।
’आशा’ कोकिल अमराई की,
लेतीं अब विश्राम।
विदा लिया केवल नश्वर ने,
परम मुक्ति अभिराम।
नमन तुम्हें हे! स्वर की देवी, भाव भरे मनमीत।
आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी


