“स्वागत में सतरंगी आभा”
#होलीकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं!
#गीत
हाट-बाट सब रंग-बिरंगे,हरित-पीत नभतल अरुणाई।
स्वागत में सतरंगी आभा,धूम-धाम से होली आई।
छटा बिखेरे रंगों वाली,
बालवृंद की अनुपम टोली।
तन को-मन को चले भिगोने,
भरकर वे खुशियों से झोली।
मस्ती करते सखा सँगाती, पीकर नाचे ज्यों ठण्डाई।
स्वागत में सतरंगी आभा, धूम-धाम से होली आई।
धूप सलोनी आँगन परसे,
प्रीति लगाए मन को भाए।
खुले केश सजनी के लहरे,
पवन निगोड़े रास रचाए।
शीत चली मदमाती पीहर,गुनगुन गाती ज्यों फगुआई।
स्वागत में सतरंगी आभा, धूम-धाम से होली आई।
ढोल-थाप पर नाचे गाएं
भंग घोलते जन हुरियारे।
मुखर हुए ठण्डाई पीकर,
झूम उठीं गलियांँ चौबारे।
चंचरीक कलियों में अनबन,रंग देख दोड़ें भरमाई।
स्वागत में सतरंगी आभा,धूम-धाम से होली आई।
————-डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी


