गीतिका

जयहिंद हिन्द की सेना

वंदेमातरम् —-
मातृभूमि तेरा अभिनंदन लिखनी अमर कहानी है ।
नैन भिगाती उनकी गाथा, जिसने दी कुर्बानी है ।

वर्ष जहाँ बीते पचहत्तर ,बातें लगती ये कल की,
#जन गण मन है राष्ट्रगान ये,गाकर याद दिलानी है ।

साक्षी है इतिहास आज भी,रक्त सनी थी धरती माँ,
एक-एक कतरों की कीमत,तब हमने पहिचानी है ।

नहीं दिवाली जली होलिका, वीर सपूतों के आँगन,
डरी नहीं बारूदों से जो, माटी यह बलिदानी है ।

नींद कहाँ थीं चैन गँवाये,लडे़ सूरमा रातो-दिन
जय हिंद हिंद की सेना की,साहस कथा जुबानी है ।

देश-प्रेम की गौरवगाथा,सहज प्रवाहित नस-नस में,
उन्नत मस्तक आज लिए ये,कहती मुखरित बानी है।
******************* डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी

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