गीतिका

वंदेमातरम्

आधार छंद – मरहट्ठा माधवी (मापनी मुक्त मात्रिक)
विधान – 29 मात्रा (चौपाई 16 मात्रा +दोहा विषम चरण 13 मात्रा)
समान्त – आरा, पदांत – वंदेमातरम्
गीतिका ——
भूलो मत सदियों से अपना,नारा वंदे मातरम् ।
जग से न्यारा मन मतवाला,प्यारा वंदे मातरम् ।

सजी निशा है अवगुंठन में,मुखर रागिनी गा रही ।
खोल पलक को सरस निहारे,तारा वंदेमातरम् ।

किरणों के रथ बैठ दिवाकर,प्राची से संदेश दे,
हुआ सबेरा कर्मठ चढ़ता,पारा वंदेमातरम् ।

लाजो धानी चूनर पहने,चंचल बाला सी धरा,
पीत वसन से लहरे परचम,न्यारा वंदेमातरम् ।

प्रेम नहीं फिर कहाँ मिलेगा,मत खोना अधिकार को,
अ़द्भुत मत अपना अभिमत है,द्वारा वंदेमातरम् ।

डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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