बरसे घन उद्दाम आज भी।।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.अनिल गहलौत मथुरा निवासी ने मेरा साहित्यिक उपनामकरण ‘लता’ @(१९/७/२०२६ से) किया है। सधन्यवाद आदरणीय को!
#सजल
समांत–आम/पदांत–आज भी
मात्रा भार -१६
*********
लगे विधाता वाम आज भी।
छिड़ा हुआ संग्राम आज भी।।
रोया मानस पीर जगाकर।
प्रेम-प्रकृति अभिराम आज भी।।
लिए मनुज-तन जग में आए।
जीते हम निष्काम आज भी।।
भोग रही काया माया में।
कर्म लिखे परिणाम आज भी।।
अंग-अंग में प्रीति जगातीं।
राधे तुम सुखधाम आज भी।।
चले राम जी त्याग अवध को।
जग गाता है नाम आज भी।।
‘लता’ प्रेम की कहे कहानी।
बरसे घन उद्दाम आज भी।।-
*डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी ‘लता’*
————– १९/७/२०२६
समांत-वाम,संग्राम,अभिराम,परिणाम,धाम, नाम, उद्दाम।

