गीतिका

मौन रहेंगे

आधार छंद – रोला
मात्रा विधान – 11+13= 24
समान्त-एंगे,पदान्त-मौन रहेंगे
गीतिका
पानी पानी मान,बहेंगे मौन रहेंगे ।
छलके अधजल ज्ञान,सुनेंगे मौन रहेंगे ।

नयन निहारे शून्य,तकेंगे मौन रहेंगे ।
पथराये ये नैन, गलेंगे मौन रहेंगे ।
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विछुड़े जीवन साज,नींदिया बैरन छलती,
पनघट सूना श्याम, मिलेंगे मौन रहेंगे ।

बढ़ा नहीं जो चीर,अस्मिता कौन बचाता,
सुने न कोई मर्म, छलेंगे मौन रहेंगे ।

चूनर देते दाग, गिद्ध कुरंग कुविचारी ,
घूम रहा हैवान, हँसेंगे मौन रहेंगे ।

करें वार पर वार,लूटते अस्मत,घाती,
झूठ खेलता दाँव,सहेंगे मौन रहेंगे ।

सत्य करे विश्राम,प्रेम दु:खी मन हारा।
डग-मग होते पाँव, गिरेंगे मौन रहेंगे ।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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