गीतिका

“पुट खोले सरसो पीली”

आधार छंद- लावणी
विधान- 30 मात्रा, 16-14 पर यति, अंत में वाचिक गा।
लावणी – चौपाई + मानव
#गीतिका
वीणा स्वर दे मातु शारदे, झूमें हृदय सलोना है ।
तिनक-तिनक धिन ढोल मंँजीरे,गीत फागुनी होना है ।

मँडराते जो फूल-फूल पर खिलता कलियों का बचपन ।
गुन गुन गाते अलि गुंजन से,महके उपवन कोना है।

काँटों की परवाह न करती,है नंदित तन-मन काया ।
पीत वसन सुबरन फहराये,रंग बसंती सोना है ।

सुखद बयारें खिलती बाँछें,घन लहर पवन लहराया ।
पुट खोले सरसों पीली ज्यों,हरित पात का दोना है

झनके नूपुर खनके कँगना,हर अंग-अंग बलखाये,
गीत गुने मन मृदुल सरस नित,बीज प्रेम के बोना है।
—————डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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