“सफल हुईं कब द्वंद्व नीतियां”
#गीत
सत्य-अहिंसा-सघन साधना,अश्रु नहीं प्रिय प्रणय चाहिए।
जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए।
संघर्ष बहुत थे पग-पग अपने,
है अतीत की गहरी गाथा।
काट तिमिर को जागृति आयी,
मिली फतह से उन्नत माथा।
सीख दिया है जिसने हमको, वृथा नहीं अब अनय चाहिए ।
जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए।
मयदानव सम खड़ी सामने,
अट्टहास कर गईं वृत्तियां ।
बिगुल बजा पंचास्य नाद का,
सफल हुईं कब द्वंद्व नीतियां ।
आज समर्पण की बेला में, धर्म-नीति का विलय चाहिए।
जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए।
व्यर्थ गंवाकर जन-धन सपने,
कुटिल नीति मुस्कानें भरती ।
बनी रुदाली सिसक रही है,
अंक लिए संतानें धरती ।
‘लता’लपेटे अस्थि-कलश को,आह न भरता हृदय चाहिए।
जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए।
———————-डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी


