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“आशा की अभिलाषा पूरी”
*स्वर की देवी आशा भोंसले* #श्रद्धांजलि: स्वर-अमरता को समर्पित #गीत छोड़ जगत को जाने वाली, गुंजित स्वर संगीत। आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत। प्यार भरे वे सुर अब गूँजे, अधर-अधर मुस्कान। श्वासों ने बन्धन तोड़े सब, स्मृतियांँ हुई महान। राग-रागिनी रजनीगंधा, अलख जगाती प्रीत। आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत। अगन लगाती शरद कौमुदी, विरहन के हिय द्वंद। अश्रु थिरे कोरों से टप-टप, लिखते अन्तिम छंद। बहे सुनामी उर-थल कंपित, मौन हुआ संगीत। आशा की अभिलाषा पूरी, सरगम भरती जीत। ’आशा’ कोकिल अमराई की, लेतीं अब विश्राम। विदा लिया केवल नश्वर ने, परम मुक्ति अभिराम। नमन तुम्हें हे! स्वर की देवी, भाव भरे मनमीत। आशा की अभिलाषा…
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“सफल हुईं कब द्वंद्व नीतियां”
#गीत सत्य-अहिंसा-सघन साधना,अश्रु नहीं प्रिय प्रणय चाहिए। जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए। संघर्ष बहुत थे पग-पग अपने, है अतीत की गहरी गाथा। काट तिमिर को जागृति आयी, मिली फतह से उन्नत माथा। सीख दिया है जिसने हमको, वृथा नहीं अब अनय चाहिए । जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए। मयदानव सम खड़ी सामने, अट्टहास कर गईं वृत्तियां । बिगुल बजा पंचास्य नाद का, सफल हुईं कब द्वंद्व नीतियां । आज समर्पण की बेला में, धर्म-नीति का विलय चाहिए। जीवन को आरक्षित करना, अन्य न कोई विजय चाहिए। व्यर्थ गंवाकर जन-धन सपने, कुटिल नीति मुस्कानें भरती । बनी रुदाली सिसक रही है, अंक लिए…





