#गीत

राधे राधे

#राधेराधे
(राधा अष्टमी को समर्पित)

अपना कौन पराया जग में,स्वामी है सिरमौर ।
मन जोगी क्या ? जाने राधे,जाना है किस ठौर ।
रूप धरे मायावी दुनिया,
घूम रही दिन रैन ।
कैसी लौकिक लीला प्यारी,
छीन रही मन चैन ।
सच है क्या तू बता राधिके, किसका है ये दौर।
मन जोगी क्या ? जाने राधे, जाना है किस ठौर ।
राम नाम की सत्य पताका,
अंतस भारी भेद।
हरित बाँस पर झीनी चादर,
मुक्ति जगत से खेद ।
करुणा कर हे कृष्णा, राधे,मुझे सिखा दे तौर ।
मन जोगी क्या ? जाने राधे, जाना है किस ठौर ।
सुनो नागरी हिय की बतियाँ,
बड़ी ठगन जग रीति ।
स्वारथ में रत कामी सारे,
छलती मन को प्रीति ।
“लता” न माने श्याम नयन ये, राधे करना गौर ।
मन जोगी क्या ? जाने राधे, जाना है किस ठौर ।
————————–डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी
गौर =
(अ.) [सं-पु.] 1. चिंतन; सोच-विचार 2. ध्यान।

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