गीतिका

कृष्ण जन्मोत्सव

आधार छंद – दोहा
समांत – आर (अपदांत)

सुत सेवक वसुदेव के,कहते नंद कुमार ।
जननी न्यारी देवकी,यशुमति करें दुलार ।।

धन्य धन्य हे मात द्वै,धन्य गोकुला ग्राम ।
कहलाये तुम नंद सुत,गोपिन के आधार ।।

बड़भागी वह बंसरी, अधर धरे श्रीधाम,
ठुमकि सजावे पैजनी,श्रीधर पाँव पखार ।।

धेनु ,सखा,नवनीत के,बिना न सोहें नाथ
शीश धरे पंँख मोर छवि,नैनन के शृंगार ।।

विरहनि मीरा श्याम की,मान करे वह दासि
संग सोहती राधिका, प्रेम बसे नित द्वार ।।
डॉ.प्रेमलता त्रिपाठी

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