• #गीत

    साक्षी है इतिहास

    “गांधी व शास्त्री जयंती पर समर्पित ————– विकट साधना संकल्पों में, सदा रहे अनुरक्त । सत्य-अहिंसा जीवन सरगम,सरस दिवा हो नक्त । उन्नति करती राष्ट्र चेतना,शिक्षित रहे समाज। ऊँच-नीच हो भेदभाव के,बने न कोई व्याज। राग-द्वेष के अगनित कारक,जहाँ करें अभिशप्त, सत्य-अहिंसा जीवन सरगम,सरस दिवा हो नक्त । ******* राष्ट्र हितों में जीवन अर्पित, जीवट तन उद्दाम । नगर गाँव तक हथकरघों से,सबको दिया मुकाम । एक वस्त्र शुचिता की माला, पुष्टि भाव संपृक्त । सत्य-अहिंसा जीवन सरगम,सरस दिवा हो नक्त । ******** कुछ कारक संकेत मानिए, दुर्बल करते मान । साक्षी है इतिहास सदा जो,छला गया अनजान। जप-तप की जहँ महके समिधा,भारत हुआ विभक्त । सत्य-अहिंसा जीवन सरगम,सरस दिवा…

  • #गीत

    परम पुनीता हिन्दी अपनी

    ✍️ #गीत पुण्य पंथ परमार्थ सनातन,सदा सुसज्जित देश । हिन्दी ही मंथन चिंतन में, करिए सदा निवेश । व्यास पराशर अंगिरादि भृगु,शतानंद सत चित्र, जहँ पुलस्त्य अगस्त्य सुचित हों,नारद विश्वामित्र । ऋषि जमदग्नि आशीष से है, पूर्ण शुद्ध परिवेश, पुण्य पंथ परमार्थ सनातन,सदा सुसज्जित देश । हिन्दी का विस्तार जहाँ से,भरत भूमि है धन्य । परम पुनीता हिन्दी भाषा,मानक मिले न अन्य । पूरब से ये सोन चिरैया, लेकर उगे दिनेश, पुण्य पंथ परमार्थ सनातन,सदा सुसज्जित देश । कर्म भूमि अपनी अवतारी, धर्म धरा सम व्योम, मनु जीवन ये प्रभु की रचना,हर्षित करती लोम । सत्य शील गीर्वाण अधर से, देती है संदेश, पुण्य पंथ परमार्थ सनातन,सदा सुसज्जित देश ।…

  • #गीत

    छंद – माधव मालती

    #गीत भूल कोई हो न दाता, राह तुम मुझको दिखाना । स्वप्न देखें ये नयन जो,ध्यान रख उसको सजाना । संग रहती चाहतें जब – डूब कर माँगे किनारा । शुष्क होते लोचनों में – पीर करुणा का सहारा । क्यों करें अपना-पराया,तुम शरण अपनी बुलाना । स्वप्न देखें ये नयन जो,ध्यान रख उसको सजाना । हो न गर्वित मान पाकर, साथ दे अपना न साया । कर रही है सत्य जग को, मुग्ध तन करती #अनाया। साधना के पथ न छूटे, मंत्र साधक तुम बनाना । स्वप्न देखें ये नयन जो,ध्यान रख उसको सजाना । बाड़ काँटों की लगाकर, अंध स्वारथ हिय न भाये । कंठ तक मद में…

  • गीतिका

    “जय भारत”

    “जय भारत” —– रहे झूमता ये तिरंगा हमारा। गगन चूमता ये चमकता सितारा।। सदा मान है ये शान हमारी । दिलों में विराजे आन हमारी । आजाद भारत की ये निशानी, अमर ये रहे वतन का सहारा । रहे झूमता ये तिरंगा हमारा——- छिपी जहाँ शहीदों की शहादत । हिंद की दौलत अपनी अमानत । चंचल हवायें सदा गीत गायें, विश्व पटल पर सजे ये नजारा रहे झूमता ये तिरंगा हमारा——- लिए वीर हाथों फड़कती भुजाएँ। उमगती धड़कन गाती ऋचाएँ । अनुगूँज लेकर जयहिंद भारत, कदम से कदम ; चमन का दुलारा । रहे झूमता ये तिरंगा हमारा——- डॉ0 प्रेमलता त्रिपाठी

  • #गीत

    सत्य सनातन

    #गीत #सत्यसनातन सत्य सनातन नाम ईश का,सबके पालन हार । सनद साधना डगमग है प्रभु;हाथ गहो पतवार । हो मेरे आराध्य देव तुम, चित्तवृत्ति अविनाश । यही कल्पना युग मन्वंतर,अरि को करे निराश । भूल रहें जो वेद ऋचाएँ, वंशज हैं हम आर्य, अविनाशी को कहे सनातन,पंच तत्व में सार । सत्य सनातन नाम ईश का,सबके पालन हार । भेदभाव मतिसुप्त करें जो,क्षुद्र हृदय भयभीत। धीर धरे साधक मन मंदिर,सुखकर ये संगीत । रही सदी से मुखर चेतना, बढ़ा रहे संताप, अंश अनागत समझ न पाये,विकल नीति आधार। सत्य सनातन नाम ईश का,सबके पालन हार । महिमा करें बखान पुण्यपथ,राम-रमा अनिकेत। मर्यादा को लाँघा जिसने, दुष्ट हृदय समवेत। क्षुद्र ग्रहों…

  • #गीत

    “मेरा मन कुंदन कुसुमाकर”

    मेरा मन कुंदन कुसुमाकर” August 2, 2023 #गीत कर देता मन को यों चंचल सागर से उठता कोलाहल ! करतीं गुहार लहरें आकर । मेरा मन कुंदन कुसुमाकर । अंग तरंगित मुखरित मेरे । तनिक निकट आओ तो टेरे । अधर चूम लो धड़के हृदतल । कर देता मन को यों चंचल ! ——- अस्ताचल सुखदा प्रियांशु को । करे नमन अभिनव सुधांशु को । पार्श्व आहटें उठती सुअंक से । खिलतीं बाँछे मिलने मयंक से । उलट-पलट भीगे तन अविरल । कर देता मन को यों चंचल ! ——- लुटा रहा निधि जलधि धीर जो । शचि आकर्षण तोड़ तीर जो । भर लेती निशि पोर-पोर है । आलिंगन…

  • #गीत

    #गीत – मधुर / मनोरम —————————– स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम, मधुशाला जीवन की। किस्से सुख-दुख अनगिन जिसमें, हम प्याला जीवन की । सरगम भरती वीणा समरस, श्वासों में रस घोले । स्याम रंग में लिखे लेखनी कुंज-कुंज में डोले । हँस हँस मिलना है अनंत में, जप माला जीवन की । स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम,मधुशाला जीवन की। पीड़ा मन की मुक्ता माणिक, शब्द शब्द रचवाए । जलना खपना इस दीर्घा में, मंचन जगत लुभाए । संचालक बनना तो केवल, मद हाला जीवन की । स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम,मधुशाला जीवन की। आज नहीं तो कल सच होगा, कुछ हारे कुछ जीते । खींची रेखा मिली जुली पर, कितने…

  • #गीत

    “मधुशाला जीवन की”

    गीत – मधुर / मनोरम —————————– स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम, मधुशाला जीवन की। किस्से सुख दुख अनगिन जिसमें, हम प्याला जीवन की । गुन गुन करती वीणा समरस, श्वासों में रस घोले । स्याम रंग में लिखे लेखनी कुंज-कुंज में डोले । हँस हँस मिलना है अनंत में,जप माला जीवन की । स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम,मधुशाला जीवन की। पीड़ा मन की मुक्ता माणिक, शब्द शब्द रचवाए । जलना खपना इस दीर्घा में, मंचन जगत लुभाए । संचालक बनना केवल तो, मद हाला जीवन की । स्वार्थ रहित हो मोहक मधुरिम,मधुशाला जीवन की। आज नहीं तो कल सच होगा, कुछ हारे कुछ जीते । खींची रेखा मिली जुली पर,…

  • #गीत

    #शिवा #शाम्भवी

    #शिवा #शाम्भवी #करिए #अर्चन लहर लहर तट रहा झकोरे, घूम रहा तूफान निराला । घूम रहा तूफान —– फँसा बटोही नगर डगर तक बना हुआ हैवान निराला । बना हुआ हैवान—- विफर पड़ी आक्रोशित लहरें शिवा शाम्भवी करिए अर्चन । जनधन की भारी है चिंता, त्राहि मचाये ये परिवर्तन । भृकुटि तानकर खड़ी आपदा, लेना है संज्ञान निराला । लेना है संज्ञान ——- शक्ति साधना अपनी करनी अनहोनी को रोके जैसे । स्वर्ण अक्षरों में लिख जाता, सिद्ध कामना होती कैसे । विवश करे यह पथ दुरूह पर होगा अनुसंधान निराला । होगा अनुसंधान —— शिवताण्डव का भान नहीं, सुन लो भस्मासुर अपघाती। अरे आसुरी माया छलनी, देवभूमि क्या तेरी…

  • #गीत

    केसर

    #गीत पथरीले पर्णल पर पगली, परवश सोई प्राण पियारी । खिली कली ज्यों धूप सुहावन, हुई यौवना केसर क्यारी । पलके खोले तो बस देखे, लाज भरी बाँकी चितवन से । जीवट जड़वत रही जोगिनी, सहमे दृग केवल विपणन से । क्षुब्ध तापसी कुटिल काम से,झेल रही अनगिन दुश्वारी । खिली कली ज्यों धूप सुहावन,हुई यौवना केसर क्यारी । ————–हुई यौवना केसर क्यारी । कशमीरी परिचय दुनियावी , कौन हृदय की पीड़ा जाँचें । महक उठे निष्कंटक पथ पर, शुचित हृदय में सबको राँचे । ध्वस्त हुई किंजल्क कल्पना,कलझे क्यों कमनीय कुँआरी । खिली कली ज्यों धूप सुहावन,हुई यौवना केसर क्यारी । ————–हुई यौवना केसर क्यारी । बीते पल अध्याय…

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