गीतिका

चुनाव

प्रदीप छंद आधारित —–
गीतिका —-
चूक नहीं करना चुनाव में,अधिमत ही मतदान है ,
‘जनता का’ ‘द्वारा जनता’ के,लिए यह संविधान है ।

चुने नहीं हम तत्व अराजक,गणतंत्र की माँग यही,
एक एक मत पड़े हमारा, धरें नीति संज्ञान है ।

नगर गाँव में चर्चाएँ हैं,जीत हार की होड़ में,
पर विवेक जो अपना साधे,नहीं गिरेगा मान है ।

गलत बयानी अन देखी क्यों,मन में होता खेद जो,
देना जबाब उन्हें करारा, छीने अपनी शान है ।

पालन रक्षण करें देश हित,मत से बदले भाग्य हम,
कदम मिलाकर बढ़े प्रेम से,मताधिकार महान है।

डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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