गीतिका

!!अमर शहीदों को नमन !!

आधार छंद- वाचिक भुजंगप्रयात
122 122 122 122
मापनी- लगागा लगागा लगागा लगागा

शहीदों नमन हिंद अपना सुहाना ।
शहादत तुम्हारी नहीं है भुलाना ।

कभी शीश अपना झुका जो नहीं है,
नजर से नजर तुम उठा कर मिलाना ।

मिले मान जीवन मिटाकर कुटिलता,
हमें नेक नीयत सदा है बनाना ।

लगे जो हया की कभी बोलियाँ तुम,
हृदय ज्वाल फूटे नहीं चुप लगाना ।

घुटन भर रहीं राजनीतिक मिसालें,
सिसक तंत्र की है हमीं को मिटाना ।

सजी पालकी हो धरा ओढ़ चूनर,
हरित मातृ अंचल सदा तुम सजाना ।

शिखर भानु शुभ दिन सजाता रहेगा,
नवल क्रांति लेकर हमें पग बढ़ाना ।
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी

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